मैं और मेरा आईना ।।२।।

जो मिला सो क्या मिला
जो खोया सो क्या खोया
कुदरत ने तो तुझे वाही दिलाया, जिसके खातिर तूने पसीना था बहाया ।।

जो जाना सो क्या जाना
जो ठाना सो क्या ठाना
प्रकृति ने तो तुम्हें वही दर्शाया, जो तुम्हारे मन को भाया ।।

Advertisements

अंतः र्द्वंद

हम जो दूर यूं खड़े थे
क्यूंकि तुम, बेवफा हो गए

हम! जो दूर यूं खड़े थे
क्यूंकि तुम बेवफा हो गए
अब जो जरूरत आन पड़ी,
तो फिर कैसे वाफाई कर गए ।

आंसु तो कमबख्त हमारे निकले
तुम कहीं छिप कर हंस रहे थे

अरे,आंसु तो कमबख्त हमारे निकले
तुम कहीं छिप कर हंस रहे थे
निर्लज मोहब्बत हमें ही करनी थी,
तुम तो अपनी बेवफाई कर रहे थे ।

धोखा तो मेरी फितरत में न था
पर तेरी बेवफाई पे मर रहे

ये, धोखा, तो मेरी फितरत में न था
पर तेरी बेवफाई पे मर रहे थे
मरना तो तेरी यादों में था
पर तुझे भूल ना जाएं इस बात से डर रहे थे ।

(Hinglish version)

Hum jo dur yun khade the
Kyunki tum, bewafa ho gaye

Hum! jo dur yun khade the
Kyunki tum bewafa ho gaye
Ab jo jarurat aan padi,
To fir kaise wafai kar gaye !!

Aansu to kambakht hamare nikle
Tum kahi Chhip kar Hans rahe the

Arry, aansu to kambakht hamare nikle
Tum kahi chhip kar Hans rahe the
Nirlaj mohobbat hume hi karni this
Tum to apni bewafai kar rahe the !!

Ye dhokha to meri fitrat me na that
Par Teri bewafai pe mar rahe the

Ye, dhokha, to meri fitrat me na that
Par Teri bewafai pe mar rahe the
Marna toh Teri yaadon me that
Par tujhe bhul na jaye iss baat se dar rahe the !!

मैं और मेरा आईना

ना चाहत रही उस मंज़र की
ना आहट सुनी समुन्दर की
फिर क्यूं नौका लिए गहरे पानी में डूबने चले ।।

ना तलाश थी उस मोती की
ना आश थी इस गोते की
फिर क्यूं रेत के सागर में डूबने चले ।।

ना चरित्र था निशाचर का
ना सौबत था बगावत का
फिर क्यूं रात के अंधकार में हम डूबने चले ।।

ना ईप्सा रही इस अमृत की
ना ऐतराज रहा उस गरल का
फिर क्यूं हम दो घूंट बेखुदी में डूबने चले ।।

ना ख़ौफ था तुम्हें खोने का
ना ख्वाहिश बची तुम्हें पाने की
फिर क्यूं तेरे याद में नैन ये डूबते रहे ।।

Problems ??

There are lots of problems but have only solution,
Start loving the problems and fight with the situation,
Everyone says they have lost the glory,
And the whole population is responsible so they have to be sorry,
Why there is a hate and curse for other?
Without knowing the fate, that someone can help them even further.

हार मत मान

ऐ मेरे हमसफर , यूँ तू मुस्कुराना न बन्द कर !
रास्ते के कुछ ठोकर से यूँ न अब तू मचल !
ले हाथ पकड़, उठ कर फिर से तू मेरे साथ चल !
और भी पत्थर पड़े हैं इस रास्ते पे , अब खुद से भी तू थोड़ा सम्हल !!

तू अकेला नही है इस वीराने में हम भी तेरे साथ खड़े हैं !
आजाने दे उन तूफानों को, कदम हमारे डटे पड़े हैं !
जब तक समय का फेर चलेगा, हम साथ लड़ेंगे और बढ़ेंगे !
हार से अब हम न डरेंगे, जीत की खातिर जमकर मेहनत करेंगे !!

मुस्कुराना भी भूल गया

अब यूँ मुस्कुराना भी भूल गया !
अब यूँ झुठी हँसी को लाना भी भूल गया !
किसी तकलीफ से लड़ना भी भूल गया !
कहीं ठोकर से डरना भी भूल गया !!

अब उस बेखुदी का पैमाना भी भूल गया !
यूँ दीदार पे नजरें चुराना भी भूल गया !
ये वक़्त का सितम तो देखो, ऐ मंज़र !
अब उनसे यूँ मिलना मिलाना ही भूल गया !!

अब बस उनकी यादों का सहारा रह गया !
अब सभी आशाओं का बस्ता पानी में बह गया !
अब तो हमारे सपनों का शहर भी ढह गया !
ये समय का फेर ही तो है ,
जो कभी रहता था करीब, उसे अपना ये दिल अलविदा भी कह गया !!

मुझे क्या हुआ ?

मोहोब्बत थी उस आग से , पर जलने से डरता था !
चाहत थी इस अंगार की , पर रुक थम कर चलता था !
इबादत थी उस हुंकार की , पर सिसकियों में चीखता था !
रुख़सत थी उस इंतजार की , पर दीदार पे मरता था !!

तमन्ना थी इस मोहोब्बत को मैं, मरते दम तक भूल ना सकूँ !
इनायत थी इस चाहत की मुझे , इसे यूँही रास्ते पे खो ना दूँ !
करूँ इबादत उस ईश्वर से मैं , हर दम लड़ कर तुझे पा मैं लूँ !
ख्वाहिश नही उस रुख़सत की , उस जुदाई का मंजर ना देखूँ !!