यादें

तूझे खोभी नहीं सकते
तूझे पा भी नहीं सकते
पता नहीं कमबख़त तेरी यादें अब भूला भी नहीं सकते !

तूझसे मौहौबत भी ना करते
तुमसे नफरत भी ना करते
पर चाह कर भी इतना
तूझे भूल भी ना सकते ।।

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नव वर्ष

वक़्त नया पर घड़ी पुरानी ।
साल नया पर महीना पुराना ।
दिन नया पर सूरज पुराना ।
रात नयी पर शमा पुरानी ।

उम्मीद नयी पर ख्वाहीशें पुरानी ।
आशाएँ नयी पर इच्छाएँ पुरानी ।
जोश नया पर होश पुराना ।
और ततबीर नयी पर तकदीर पुरानी ।

खुशी नयी पर हँसी पुरानी ।
मदिरा नयी पर मदहोशी पुरानी ।
दर्द नये पर जखम पुराने ।
और क्रोध नया पर फितूर पुराना ।

बस यही बात है आपको बतानी
नव वर्ष की शुभकामनाएँ थी जतानी ।।

क्यूँ ????….

क्यूँ नफरत करूँ इस जीवन से मैं
जिसने हर दम हमे लड़ना सिखाया !

क्यूँ मुह फेरूं इस किसमत से मैं
जिसने गिर कर भी सम्हलना सिखा दिया !

क्यूँ नाराजगी इस वक़्त से हमें
जिसने हर बुरे समय में आगे बढ़ना सिखाया !

क्यूँ ख़फा करूँ उन मा-बाप से मैं
जिन्होंने पग-पग पर चलना सिखाया !

क्यूँ रुष्टता उन यारों से हमें
जिनके साथ ने गिर कर भी उठना सिखाया !

क्यूँ डरुँ दुश्मनी निभाने से मैं
जिन्होंने हारने के बाद भी जितने का रास्ता बतलाया !

क्यूँ क्रोध करुँ उन झूठे दोस्तों से मैं
जिनके धोखे ने हमे बदलना सिखाया !

क्यूँ बैर उस बेवफ़ा से हमें
जिसने इस टूटे दिल को भी धड़कना सिखलाया !

क्यूँ मुसीबत उस सच्चाई से हमें
जिसने हास्य में ही हमारी गलतियों को झलकाया !

क्यूँ आफत उस सोंच से हमें
जिसने एक अलग दिशा में देखना सिखलाया !

क्यूँ तकलीफ उन ख़्वाहिशों से हमें
जिसने हमें खुलकर जिना सिखलाया !

तो फिर क्यूँ कष्ट इस जीवन से हमें
जो हमारे वजूद को इस जहां में लाया !

मोहब्बत ना करना

एक लम्हा तुम ठहरना
अपनी ख़ामोशी में मचलना
गिर के तुम सम्हालना
पर कभी मोहब्बत ना करना!!

अपनी सादगी में तुम रंगना
अपनी सच्चाई में तुम जलना
उनकी तक़लिफों में डरना
पर कभी मोहब्बत ना करना !!

अपनी ख़्वाहिशों को पार करना
अपनी मुसीबतों से तुम लड़ना
अपनी चाहतों को दिल से दूर भगाना
पर कभी किसी के लिए मोहब्बत ना जगाना !!

Something real

अज्ञान के सागर में, उम्मीदों की नौका लिए
आशाओं की लहरों पे, सफलता के किनारे ढूंढते थक गया, अपने इस असीमित लक्ष वाला जीवन जीते जीते पक गया।

कुछ तो लोग कहेंगे लोगों का काम है कहना। हर वक़्त है चलते रहना , हर तकलीफ को है सहना। और कितना भी समय बदल जाए पर हर पल ऐसे ही हंसते रहना

रेल का वो सफर

रेल का वो सफर जिसने समय तबाह किया।
देर देर कर के सफर के नाशे से ख़फा किया ।।

वो भी क्या दिन थे जब घूमना ही लक्ष्य हुआ करता था।
पर ये अनन्य रास्ते के इंताजर ने हमें परेशान किया।।

जो जोश था अपने घर के आंगन में जाने का।
उस खुशी को इस रेल के असीमित सफर ने डूबा दिया ।।

क्या करें हम इस बढ़ते समय का।
जो रेल के लंबे सफर में गुमा दिया ।।

सोंचा एक पल खुद के भविष्य का ही देख लें।
फिर याद आया इसे अपने वर्तमान के कर्मो पर छोड़ दें।।

अब ये गाड़ी अपने गंतव्य को पहुंच रही।
और साथ ही पेट में भी भूख की अग्नि दहक रही।।

अपनी मंजिल पर पहुंचने की खुशी तो हैै।
पर चहरे पर विलंब होने की निराशा है ।।

क्या करें जब रेल विभाग ने ही हमसे दगा किया।
जिसके सफर ने हमारे समय को तबाह किया।।

ये तूने क्या किया ?

ऐ ख़ुदा तूने ये क्या किया ।
इस नास्तिक को तेरा नाम लेना सीखा दिया।

जो बचपन से था शैतान।
उसे वक़्त की मार ने इंसान बना दिया ।।

जो फिरता था दिखावे की मादकता में।
उसे दैहकते ज्ञान के सागर में डूबा दिया।।

जिसे नशा था अंधकार का ।
उसे उजाले से प्रेम करना सीखा दिया।।

जिसे घमंड था अपनी निडरता से।
उसे फीकी पराकाष्ठा से डरना सीखा दिया ।।

जो सवाल करता था तेरे अस्तित्व पर ।
उसे निराकार ऊर्जा का भक्त बना दिया

ऐ खुदा तूने ये क्या किया ।
इस नास्तिक को खुद से मोहब्बत करा दिया।।